बस्ती, 06 जनवरी 2017। चैधरी चरण सिंह ने कहा था कि किसानों को अपने हक के लिये एक पैर खेत की मेड़ पर तो दूसरा दिल्ली में रखना होगा। कृषि प्रधान देंश में किसानों की उपेक्षा से बड़ा दुर्भाग्य कुछ नही है।
यह बातें राष्ट्रीय लोकदल के महासचिव राजा ऐश्वर्यराज सिंह ने कहीं, वे 8 जनवरी को बस्ती के पचपेड़िया रोड पर आयोजित किसान अधिकार रैली के निमित्त प्रेस कलब सभागार में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होने कहा कि रैली पूर्वांचल के किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी। इसमें राष्टीय लोकदल सहित साझा दलों के दिग्गज किसानों का कर्ज माफ किये जाने तथा गेहूं पर आयात शुल्क को घटाये जाने के फैसले को वापस लिये जाने की मांग प्रमुखता से उठायेंगे। ऐश्वर्य ने यह भी कहा कि नोटबंदी के बाद बैंकों में पर्याप्त धन आ गया है इस पर सबसे पहला हक किसानों का है, सरकार को किसानों का ऋण तुरन्त माफ कर देेना चाहिये। उन्होने पार्टी कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की जनता से रैली को सुल बनाने की अपील किया। मण्डल अध्यक्ष ओमप्रकाश चैधरी ने कहा कि संपर्क के दौरान जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है जो रैली की सफलता को रेखांकित करता है।
राष्ट्रीय सचिव ओंकार सिंह ने कहा कि देश में आम आदमी की बुनियादी जरूरतें पूरी करने वाली नीतियां नही बन रही हैं, अमीर और अमीर तथा गरीब और अधिक गरीब होता जा रहा है, नीति निर्णारण में किसानों की उपेक्षा हो रही है। राष्ट्रीय लोकदल हमेशा से कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में बजट बढ़ाने की मांग करता आ रहा है। इन्ही सब सवालों को लेकर किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से रैली आयोजित की जा रही है। आने वाले विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को इस बात का ध्यान रखना होगा कि कौन सा राजनीति दल किसान हितों की बात करता है और किसकी नीतियां कृषि और किसान को समृद्ध बना सकती है। रालोद नेता ने केन्द्र की मोदी सरकार पर हमला बोलते हुये कहा कि भाजपा ने जो चुनाव घोषणा पत्र लेकर जनता से वोट मांगा था उसकी अनदेखी किया है। देश की जनता जानती है, पार्टी को इसका खामियाजा भोगना पड़ेगा।
प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह ने कहा कि किसान अधिकार रैली पूर्वांचल के राजनीति की दशा एवं दिशा तय करेगा। पत्रकार वार्ता में ताहिर अली, शिवकुमार गौतम, बब्बू खान, डब्लू सिंह, पप्पू यादव, डा. फारूक, मो0 तैयब, सामइन फारूकी, राय अंकुरम श्रीवास्तव सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

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